बाइबल के अनुसार उपवास क्या है? संपूर्ण अध्ययन।


आज हम बात करने वाले है, बाईबल के अनुसार उपवास (फास्टिंग) के विषय में जो कि बहुत ही महत्वपुर्ण विषय है ।

अगर आप इस पूरे आर्टिकल को पढ़ेंगे तो आप ज़रूर आशीष को पाएंगे।

1) उपवास क्या है?

2) उपवास के प्रकार? 

3) उपवास क्यों करना है?

4) किन परमेश्वर के लोगो ने उपवास किया और उसका रीजल्ट क्या हुआ?

5) उपवास कब किया जा सकता है ?ओर कैसे करना है?

6) उपवास कितने दिन का करना है/कर सकते है ?

7) यीशु मसीह का उपवास किस प्रकार का था ?



1.उपवास क्या है?

1) बाइबिल के अनुसार उपवास एक पवित्र समय है ,जिसमे प्रभु के लोग भोजन या अन्य सुख सुविधाओ से दूर रहते हुए और समय निकालकर परमेश्वर परअपने मन को लगते है 

2) उपवास अपने आत्मिक जीवन और शारीरिक जीवन को बनाने का समय है .

3) उपवास अपने आप को नम्र और दिन और ज्योति की संतान बनने का समय.

4) उपवास अपने शरीर की अभिलाषाओ पर जयवंत होने का समय    


 2.उपवास के प्रकार?

1) संपूर्ण उपवास:- पानी नहीं पीना है ,खाना नहीं खाना है.उदा :- योना 3:7,,प्रेरित 9:9

** मट्टी 4:1,,,11,,, येशू मसीह का उपवास और उसकी परीक्षा, और अधिक जानकारी के लिए इन वचनों को जरूर पढ़िए! मरकुश 1:12,,13, लुका 4:1,,13, योएल 2:12 ,

निर्गमन 24:12 एस्तेर 4:15,,,,,16, निर्गमन 34:28,,, मूसा का 

2) सामान्य उपवास:- जिस प्रकार से हम लोग हमेशा से उपवास करते आए है वैसा ही ,,इसमें (पानी,चाय,या जुश) जैसा पेय पदार्थ ले सकते है. उदा- 

 3) आंशिक उपवास:- इसमें अपनी फेवरेट चीजे नहीं खाना है उदा- करना क्या है ?,, जिस प्रकार दानियेल ने उपवास किया है (दानियेल 10:3) 

‭‭दानिय्येल‬ ‭10:2‭-‬3‬ ‭[ 2] उन दिनों मैं, दानिय्येल, तीन सप्‍ताह तक शोक करता रहा।     21 दीन का उपवास 

[3] उन तीन सप्‍ताहों के पूरे होने तक, मैं ने न तो स्वादिष्‍ट भोजन किया और न मांस या दाखमधु अपने मुँह में रखा, और न अपनी देह में कुछ तेल लगाया। 

4) उचित आत्मिक उपवास:- जो बाते हमें परमेश्वर से दूर करती है उन बातो से दूर रहना है, जैसे मोबाइल,टीवी, एवं अन्य टेलीविजन की दुनिया से दूर रहना है ।

•करना क्या है ?.यशायाह 58:6

[6] “जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूँ, वह क्या यह नहीं, कि अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहनेवालों का जूआ तोड़कर उनको छुड़ा लेना, और सब जूओं को टुकड़े टुकड़े कर देना? लोगों की सुधी लेना है। जब हमारा ध्यान बाकी सारी बातो से बाहर आएगा तभी हम लोगो की बातों, परेशानियों, समस्याओं पर ध्यान दे पाएंगे।

5) झुटा या दिखावे का या पाखन्डियो का उपवास:-

‭‭मत्ती‬ ‭6:16‬ “जब तुम उपवास करो, तो कपटियों के समान तुम्हारे मुँह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुँह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें। मैं तुम से सच कहता हूँ कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।

‭‭लूका‬ ‭18:10‬ ‭“दो मनुष्य मन्दिर में प्रार्थना करने के लिये गए; एक फरीसी था और दूसरा चुंगी लेनेवाला।


3.उपवास क्यों करना है?

1) क्योकि ये परमेश्वर की इच्छा है (योएल 2:12)

2) ऐसा करने से परमेश्वर प्रसन्न होते है और हमारे देश परिवार को आशीष देते है (यशायाह 58:6)

3) अपने प्रत्येक निर्णय को लेने से पहले करना है,क्योकि ऐसा करने से हम बहुत से गलत निर्णय लेने से हम बच सकते है .(प्रेरित 14:23), (प्रेरित13:2)

4) ताकि परमेश्वर हमे इस्तमाल करे और हमारे द्वारा बढ़े और अद्भुत कम और ऐसे कम जो हमारी आखो ने नहीं देखा जो हमारे कानो ने नहीं सुने वे काम परमेश्वर हमारे द्वारा करे,,(दानियेल 9:3)


4.उपवास कब किया जा सकता है ?

1) मूसा ने सिनै पर्वत पर उपवास किया (निर्गमन 34:28)। 

7) हन्ना ने उपवास किया जब वह परमेश्वर से एक बेटा चाहती थी (I शमूएल 1: 7)।

 8) दाऊद ने कई मौकों पर उपवास किया। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने अपने शिष्यों को उपवास करना सिखाया (मरकुस 2:18, लुका 5:33)।

 9) कुरनेलियुस ने अपनी कैसरिया में दर्शन मिलने से पहले उपवास किया। (प्रेरितों के काम 10:30) 

 10) अन्ताकिया में कलिसिया ने उपवास किया जब उन्होंने उनकी पहली मिशनरी यात्रा पर पौलूस और बरनाबास को भेजा (प्रेरितों के काम 13: 3)।



5. उपवास कैसे करना चाहिए ? | उपवास के नियम क्या क्या है ?

1) लोगों को दिखाने के लिए या लोगों को प्रभावित करने के लिए उपवास न करें. – (मत्ती 6:16) प्रभु यीशु ने यह बताने से पहले की कैसे उपवास करना चाहिए यह बताया कि कैसे नहीं करना चाहिए. यदि हम लोगों को दिखाने के लिए उपवास करते हैं तो अपने स्वर्गीय पिता से जो गुप्त में देखता है उससे प्रतिफल या ईनाम नहीं पायेंगे.

2) सामूहिक रूप से कलीसिया में प्रार्थना करें. – बाइबल में अनेक उदाहरण हैं जहाँ सामूहिक रूप से प्रार्थना की गई और परमेश्वर ने उस प्रार्थना में आशीष दिया जैसे नीनवे के लोगों ने प्रार्थना की और परमेश्वर ने पूरा का पूरा देश को नाश होने से बचा लिया. (योना) और यहोशापात राजा के राज्य में तीन शत्रु सेना ने आक्रमण कर दिया तब उसने उपवास प्रार्थना की और परमेश्वर ने उसे विजयी किया.

3) अकेले या व्यक्तिगत भी उपवास करें. – हमें अकेले भी प्रार्थना करना चाहिए लिखा है जब तू प्रार्थना करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो ताकि लोग नहीं बल्कि तेरा पिता जो स्वर्ग में है तुझे उपवासी जाने. (मत्ती 6:17)

4) प्रार्थना के साथ उपवास करें. – उपवास कोई भूख हड़ताल नहीं हैं यह परमेश्वर के साम्हने नारा लगाना या हाथ पैर पटकना नहीं है बल्कि नम्र होकर प्रार्थना विनती करना आवश्यक है यदि उपवास में प्रार्थना नहीं है तो वह उपवास नहीं है. उपवास रखकर पूरे दिन बिस्तर में सोते रहने से भी वह उपवास नहीं हैं.

5) वचन के साथ और वचन के अनुसार उपवास करें. – उपवास प्रार्थना में परमेश्वर के वचन का बहुत बड़ा महत्त्व है प्रभु यीशु ने कहा, तुम केवल रोटी से नहीं बल्कि परमेश्वर के वचन से भी जीवित रहोगे. परमेश्वर का वचन ही हमारे लिए मार्गदर्शक है कि कैसे उपवास रखें. उपवास और प्रार्थना में परमेश्वर हमें अपने वचन से बातें करते हैं.

6) पश्चातापी मन के साथ उपवास करें. – घमंड या क्रोध में उपवास करना व्यर्थ है परमेश्वर का वचन बताता है अपने सम्पूर्ण मन से…और रोते पीटते…अर्थात नम्र हृदय के साथ मेरे पास आओ. (योएल 2:12)

7) पवित्रात्मा की अगुवाई में उपवास करें. – यीशु मसीह आत्मा के अगुवाई से 40 दिन और रात उपवास किया. हमें विशेष उद्धेश्य के साथ एवं आत्मा की अगुवाई में उपवास करना चाहिए.


6. उपवास के लाभ एवं सावधानियां बताएं | उपवास रखने से क्या फायदा होता है ?

1) बाइबल में परमेश्वर के दास दासियों ने जब उपवास के साथ प्रार्थना किया , तब परमेश्वर ने बड़े बड़े अद्भुत कार्यों को उनके जीवन में और उनके देश में किया. एक सही उद्देश्य से किया गया उपवास हमेशा एक बड़ी आशीष को लेकर आता है. बड़ी बड़ी आत्मिक जागृति हमेशा ही उपवास और प्रार्थना के साथ ही आइ हैं.

2) उपवास से विजयी प्राप्त होती है. – राजा यहोशापात ने जब उपवास के साथ प्रार्थना किया तो परमेश्वर ने उसकी सेना को तीन शत्रु राजाओं से युद्ध में विजयी किया।

3) उपवास से नम्रता और दीनता प्राप्त होती है. – राजा आहाब ने जब उपवास किया तब वह नम्र और दीन हो गया….और परमेश्वर ने उस पर आने वाली समस्या को दूर कर दिया।

4) उपवास से देश में आने वाली विपत्ति टल जाती है. – परमेश्वर ने नीनवे देश में जो हानि करने को ठाना था. जब उस देश में क्या छोटे क्या बड़े सभी लोगों ने उपवास किया तब परमेश्वर ने उस देश को नाश नहीं किया और उस विपत्ति को टाल दिया।

5) परमेश्वर की सेवकाई के लिए भेजा गया (नियुक्ती) – पहली शताब्दी की कलीसिया के लोगों ने जब एक साथ उपवास प्रार्थना की तब परमेश्वर के पवित्रात्मा ने पौलुस और बरनाबास को सेवा कार्य हेतु भेजा।

6) उपवास के द्वारा परमेश्वर समस्या का समाधान करता है – जब नेह्म्याह ने अपने इस्राएल की समस्या के विषय प्रार्थना और उपवास किया तो परमेश्वर ने एक अन्य जाति राजा के द्वारा भी उपाय किया और समस्या का समाधान हुआ।



5.किन परमेश्वर के लोगो ने उपवास किया और उसका रीजल्ट क्या हुआ?

1) मूसा ने 40 दिनों और 40 रातों के दौरान उपवास किया जब वे पर्वत पर ईश्वर से इसराइल का कानून प्राप्त करने गया था। निर्गमन 34:28

2) संकट या परेशानी के समय में प्रार्थना और उपवास अक्सर किया जाता था जैसे राजा दाऊद ने उपवास किया जब उसे पता चला कि शाऊल और जोनाथन मारे गए हैं। (2 शमूएल 1:12)

3) देश को बचाने के लिए, उसे बदलने के लिए और उसकी उन्नति के लिए भी उपवास और प्रार्थना किए गए जैसे नहेमायाह भविष्यवक्ता ने किया जब उसे पता चला की यरुशलम अभी भी खंडर है। (नहेमायाह 1:4)

4) हम उपवास और प्रार्थना इसलिए भी करते हैं ताकि हम शारीरिक और दुनिया की और परीक्षाओं से बच सकें जैसे यीशु ने शैतान के परिक्षा करने से पहले 40 दिन और 40 रात तक उपवास किया।(मत्ती 4 :2)



6. उपवास कितने दिन का करना है/कर सकते है ?

1) बाइबल के समय में, उपवास आम तौर पर एक दिन की लंबाई के होते थे। न्यायियों 20:26 है, हूतब सब इस्राएली, वरन सब लोग बेतेल को गए; और रोते हुए यहोवा के साम्हने बैठे रहे, और उस दिन सांझ तक उपवास किए रहे, और यहोवा को होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।”

2) लेकिन कभी-कभी, बाइबल के समय में उपवास तीन दिन (एस्तेर 4:16)

3) या यहां तक कि सात दिन के होते थे (1 शमूएल 31:13)

4) प्रेरितों के काम 13:3 तब उन्होंने उपवास और प्रार्थना कर के और उन पर हाथ रखकर उन्हें विदा किया॥ प्रेरितों के काम 14:23

और उन्होंने हर एक कलीसिया में उन के लिये प्राचीन ठहराए, और उपवास सहित प्रार्थना कर के, उन्हें प्रभु के हाथ सौंपा जिस पर उन्होंने विश्वास किया 

5) प्रभु यीशु मसीह ने आत्मा की अगुवाई में 40 दिन और रात निराहार रहकर उपवास किया और पृथ्वी पर अपनी सेवा प्रारंभ की.






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